एक गज़ल!

तुम्हारे होने की सफाई नहीं देता, ये लहजा सच्चा सुनाई नहीं देता, तुम्हें जो इल्म है, तुम ही बेहतर हो, यही इल्म जहालत से रिहाई नहीं देता! इतनी भी क्या अना कि आइने में भी, ख़ुद अपने सामने कोई दिखाई नहीं देता! इस दौर की ये बड़ी सीधी हक़ीक़त है, भलाई के बदले कोई भलाई… Continue reading एक गज़ल!

लौट के बुद्धू जब घर आता है!

लौट के बुद्धू जब घर आता है, तो पाता है, घर से जाना ठीक था शायद! माँ हाथ से अब नहीं खिलाती, “छोटू...लड्डू “ कह नहीं बुलाती, मुझ को पापा डाँटे तो भी, आँखों आँसू भर नहीं लाती, बुद्धू ख़ुद से भी घबराता, दो-दो चार समझ नहीं पाता, बचपन अपना ठीक था शायद! देर से… Continue reading लौट के बुद्धू जब घर आता है!

‪मिट्टी की छटपटाहट महसूस की तुमने?‬

आँधी बहुत तेज़ थी, लोग कह रहे है कि रेत का तूफान था, घर में हर जगह मिट्टी हो गयी है, पर लोग सहमे हुए नहीं है..क्युंकि तूफान अब थम गया है! क्या सभी तूफान थम जाते है? जब मन क्रंदित हो..और वेदना आंदोलन के चरम पर.. और कोई पूछ ले “कैसे हो? कुछ कहना… Continue reading ‪मिट्टी की छटपटाहट महसूस की तुमने?‬

रूक जाना नहीं..!

स्थिरता में कठिनाई बहुत है, बहने में आसानी है रूकना अच्छी बात नहीं है, पल भर की नादानी है बहती नदियां, हवा भी बहती धरती कहाँ कब रूकती है? आकाश भी देखों स्थिर कहाँ है? अग्नि धधकती रहती है इन तत्वों का घोल परंतु, रूकने पर आमादा है, थोड़ा थोड़ा बेवकूफ़ है, ज़िद्दी थोड़ा ज्यादा… Continue reading रूक जाना नहीं..!

हिम्मत करों…तुम बोल दो..!

जब बोलना बहुत मुश्किल लगे, और चुप रहना नामुमकिन हो, बस ज़रा हिम्मत करो...तुम बोल दो..! बोल दो कि बोलने से जख़्मी होगा बस लहजा तुम्हारा, बस ये कि तुम्हारी आवाज़ में खराशे उभर आएंगी, मगर जो तुम चुप रहे... ये दिल भर जाएगा..आँखे भर आएंगी... छलनी हो जाएगा सीना...आत्मा तड़प जाएगी..! बोल दो...बस ज़रा… Continue reading हिम्मत करों…तुम बोल दो..!