रोज़ डे!

आज तुम्हें गुलाब नहीं दूंगा मैं! #RoseDay मोहब्बत कोई बंधन नहीं है... मैं तुम्हें बाँधना नहीं चाहता। मेरे विचार में बाँध देने से मोहब्बत मोहब्बत नहीं रहती। ऐसा नहीं कि बँधन में रहते हुए स्वच्छंद नहीं रहा जा सकता परंतु प्राय: ऐसा बंधन कम ही देखने को मिलता है। मैं तुम्हें बाँधना नहीं चाहता, मैं … Continue reading रोज़ डे!

कैसा खेल था बचपन!

ज़िंदगी का..जीवन से मेल था बचपन, और हम समझे खेल था बचपन! कॉपी पे नई ज़िल्त चढ़ाना, नाम लिख पर्ची चिपकाना, सुलेख से भरना पहला पन्ना, मन से ख़ूब नक्काशी करना, हस्तलेख की सुंदर रचना, अंतिम पन्नों की वो गणना, याद है स्पष्ट सब.. किसी से साझा नहीं किये जो, नई कलम और बक्सा कलम … Continue reading कैसा खेल था बचपन!

मोहब्बत इत्रदानी है!

ख़्वाबों की इत्रदानी है, मोहब्बत जावेदानी है! चुगलियां करती है दुनिया, उसको रीत निभानी है! तुम पे कितनी फबती है, ये जो मेरी निशानी है! दोनों अक्सर कहते थे, हम को प्रीत निभानी है! हँसती आँखों में आँसू है, ये एक अलग कहानी है! भूल गये हो नाम भी मेरा? खै़र,छोड़ो बात पुरानी है! #Nkpenning