दोस्त..!

लॉ कॉलेज का वो शायद तीसरा या चौथा दिन था। अपनी क्लास में घुसा ही था कि बाहर से छात्र संघ के चुनाव प्रचार का जोरदार शोर कानों में पड़ा। नज़र खिड़की से बाहर गई तो दिखा एक लड़का…बेढंगी सी कैपरी और टीशर्ट डाले हुए प्रचार को लीड कर रहा था…

” क्यों पड़े हो चक्कर में,कोई नहीं है टक्कर में”

” ३ नम्बर यार का बाकी सब बेकार का”

जैसे ना जाने कितने नारे जोर जोर से चिल्लाते हुए हुजूम आगे बढ़ गया।

क्योंकि अभी कॉलेज शुरू ही हुआ था सो कोई दोस्त नहीं था मेरा, पर कुछ लोगो से परिचय जरुर था, उस कैपरी वाले से भी।

एक महीने बाद जब चुनाव सम्पन्न हो गए तब जाकर कॉलेज में कुछ इन्सानी वातावरण महसूस हुआ। क्लास में घुसा तो देखा वो बेढंगी सी कैपरी वाला लड़का मेरी ही बेंच पर विराजमान था।

उसने मुस्करा कर मेरी तरफ देखा, मैने भी जवाबी कारवाही करते हुए smile बैक कर दिया.

इसके बाद हर रोज़ smile में ही बात होती रही..एक सेमेस्टर निकल गया पर अब तक उसका नाम भी नहीं पूछा था मैनें…

मेरे लिए

नए रिश्तो की शुरुआत जरुरत से ज्यादा धीमी रहती है…कारण शायद मैं भी नहीं जानता!!

सेमेस्टर ब्रेक के बाद कॉलेज में एंट्री करते ही नजर उस कैपरी वाले पर ही पड़ी..मैं नजर बचा कर निकलना चाह रहा था..

पर साथ से निकलते हुए उसने रोका..

“मनीष”…हाथ मिलाते हुए उसने कहा…मैने भी smile करते हुए अपना परिचय दिया..”नितिश”

कैंटीन एरिया था..और वो वहा चाय का इंतजार कर रहा था..चाय आते ही उसने अपनी चाय का कप मुझे दिया..और अपने लिए एक और लाने का आर्डर कर दिया..

मैने मना किया..पर उसने यूं देखा मानो आदेश किया हो..मुझे अजीब सा लगा..ऐसे देखा मानो बड़ा भाई हो मेरा..बचपन से अबतक किसी बाहर वाले ने यूं अपने होने का एहसास नहीं कराया था…

कैंटीन एरिया..किसी भी लॉ कॉलेज में वह स्थान होता हैं..जहाँ दोस्त चाय पर चर्चा करते हैं…चाय से शुरु हुई बात..देश विदेश की राजनीति,कानून के बाद “अगला लेक्चर किसका है” पर आकर समाप्त होती हैं.

उस दिन भी ऐसा ही हुआ था..

वहाँ काफी देर तक हँसी मजाक चला..फिर सब अपनी क्लास की ओर बढ़ गए..!

नई दोस्ती की इब्तिदा हो चुकी थी..!

दूसरे सेमेस्टर की क्लासिस शुरु हो गई थी।

पहले सेमेस्टर की परीक्षा खत्म हुए महीना हो चला था,पर रिजल्ट नहीं आया था…अक्सर ऐसा हुआ करता हैं..

इस बीच जान पहचान जो दोस्ती में बदल चुकी थी मजबूत होने लगी…

मनीष..स्वभाव से बहुत मज़ाकिया था…पर ऐसी बात जिससे किसी को दुख लगे..कहने से पहले हजार बार सोचता था..

“किसी से कड़वा नहीं बोला जाता यार”..मेरे टोकने पर कहा करता था मुझसे..!

सबसे अलग था वो..!

रिजल्ट आने पर कहता था…देख दोस्त है ना..मेरा रिजल्ट मत देखियो..बताईयो भी मत..!

वो डरता था।

सभी नेता लोग उसी का रिजल्ट सबसे पहले देखते थें..चूंकि सभी जानते थे कि मनीष election में उतरा तो बाकियों को एक दो वोट मिलना भी मुश्किल हो जाएगा..!

वो सब यहीं दुआ मनाते रहते “बस एक सब्जेक्ट में बैक लग जाए…ताकि इलेक्शन ना लड़ने पाए”

मनीष खुद कभी election लड़ना चाहता ही नहीं था पर ये बात वो कभी खुलकर नही कहता था..”भाई इसी मे मजा आता हैं..सब यही सोचते रहे कि लड़ेगा तो यहीं जीतेगा”

“मियां हार गए तो कॉलेज में नजरे नीचे करके चलना ना हो पाएगा..”

खुशफहमी के मजे लिए जाओं..!!

मस्त मलंग ने अपनी भाषा मुझे भी सिखा दी..मौज-मस्ती में लॉ पूरी भी हो गई…बिना बैक आए..

आज कॉलेज खत्म हुए ६ साल से ज्यादा हो चुके हैं…सभी साथी अपनी डगर पकड़ चुके हैं यानि सब दूर हो चुके हैं..यदा-कदा मिल जाते हैं..

पर मनीष..वो तो मुझ में ही रहता हैं..और मैं शायद उसमें..

4 thoughts on “दोस्त..!”

  1. How lucky manish is to have a friend like you sir !
    Real story always gives a different joy , so thanks for sharing it with us sir…

    Like

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