आसमान का तारा

     
एक तारा मेरा है आसमान में..मैं जिससे बातें करता हूं..वो गीत मुझे कुछ कहता हैं,मैं अपने किस्से गढ़ता हूं..

सुख-दुख अपने जीवन के मैं उससे बाँटा करता हूं..

एक तारा मेरा है आसमान में..मैं जिससे बातें करता हूं..!!
रात गई जो उसमें मेरा तारा आना भूल गया,

भोर भई वो आसमान में अपना ठिकाना भूल गया..

मैं अपनी बातों में फिर भी उसकी ही बातें करता हूं..

एक तारा मेरा है आसमान में..मैं जिससे बातें करता हूं..!
वो भी अपने मन में शायद मेरी बातें करता होगा,

मेरी यादों मे अपने दिन को राते करता होगा..

उसका हाल तो वो ही जानें..मैं यहाँ पर आहें भरता हूं..

एक तारा मेरा है आसमान में..मैं जिससे बातें करता हूं..!
याद मुझे हैं कैसे इक दिन देख मुझे मुस्काया था,

मेरे पहलु में वो रोशनी चाँद की ओढ़ के आया था..

बोला मुझसे-ऐ दोस्त मेरे क्यूं मुझको देखा करते हो..

मैं तुमसे इतनी दूर पड़ा,क्या मुझसे पूछा करते हो..??

कहा मैनें-ऐ यार मेरे

ये बात सुनी थी कहीं मैनें..

” जो रुठ जाते हैं हमसे तारो में जा बसते हैं ”

तेरे रूप में मैं अपने 

“अपनो” को तलाशा करता हूं..!
हैं तारा मेरा इस आसमान में..मैं जिससे बातें करता हूं..!!

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