मोहब्बत इत्रदानी है!

ख़्वाबों की इत्रदानी है, मोहब्बत जावेदानी है! चुगलियां करती है दुनिया, उसको रीत निभानी है! तुम पे कितनी फबती है, ये जो मेरी निशानी है! दोनों अक्सर कहते थे, हम को प्रीत निभानी है! हँसती आँखों में आँसू है, ये एक अलग कहानी है! भूल गये हो नाम भी मेरा? खै़र,छोड़ो बात पुरानी है! #Nkpenning

“Death – A nature’s Gift”

When the umbilical cord is cut, the life is given a chance to live in its own way. Freedom is the first gift that nature gives & fairly No one grieves the cutting of umbilical cord. Existence on this planet is in no manner different than the gestation period which life takes before cutting the … Continue reading “Death – A nature’s Gift”

ओस की बूंदें और मैं!

अश्रुधारा से तुम क्यूँ अकारण, इस ह्रदय को विह्वल करते हो? मुझे पुन:आगमन करना ही हैं, मन क्यूं करूणा से भरते हो? समाज के व्यर्थ प्रलापों से क्या प्रेम तुम्हारा पतित हुआ? कितनी सुंदर तो बरखा थी, मन क्यूं न तुम्हारा हरित हुआ? तुम्हारे नंगे पैरों के स्पर्श से मैं (ओस की बूंद) मारा गया … Continue reading ओस की बूंदें और मैं!

अंत:मन का व्याकरण!

वेदना मानसिक होती है, कष्ट शारीरिक होता है, परंतु जब भी किसी विशेष से माधुर्य भंग हुआ, मैंने अनुभव की शारीरिक वेदना, मानसिक कष्ट! विचार मानसिक होते है, और वाणी बाह्य पर हर्ष के उन्मादी पलों में मैंने पाया मानस को विचार-शून्य, वाणी को मौन! प्रेम मानसिक होता है, प्रदर्शन भौतिक, किंतु भौतिकता से प्रेम … Continue reading अंत:मन का व्याकरण!

पोस्टमॉर्टम

उसके मानस पटल पर संघर्षों की चोट थी, उसकी हिम्मत बुरी तरह से ज़ख्मी थी, उसका साहस टूट चुका था, आशाओं का उबलता रक्त जम चुका था, सो आँखों में आता न था, वो थम चुका था, रूक चुका था! किंतु इनमे से कोई या ये सब मिलाकर भी, उसकी मृत्यु का कारण नहीं थे! … Continue reading पोस्टमॉर्टम

हिदायतें…शिकायतें..ख़्वाहिशें!

दस्तूर ही सही कि ख़्यालों की नुमाइश होनी चाहिए ज़ेहन में लफ़्ज़ों की मगर आज़माइश होनी चाहिए! कह न सको जो ख़ुद तो कहलवा ही दो किसी से, रिश्तों में यार इतनी तो सदा गुंजाइश होनी चाहिए! तेरे बाद ये भी अब उलझन है कि दुआओं में, माँगा भी जाता नहीं जिसकी फरमाइश होनी चाहिए! … Continue reading हिदायतें…शिकायतें..ख़्वाहिशें!