हिदायतें…शिकायतें..ख़्वाहिशें!

दस्तूर ही सही कि ख़्यालों की नुमाइश होनी चाहिए ज़ेहन में लफ़्ज़ों की मगर आज़माइश होनी चाहिए! कह न सको जो ख़ुद तो कहलवा ही दो किसी से, रिश्तों में यार इतनी तो सदा गुंजाइश होनी चाहिए! तेरे बाद ये भी अब उलझन है कि दुआओं में, माँगा भी जाता नहीं जिसकी फरमाइश होनी चाहिए!… Continue reading हिदायतें…शिकायतें..ख़्वाहिशें!

दोस्ती मुबारक!

कहते है ये कि हमने कुछ नहीं किया दोस्त सुनना चाहते ही नहीं “शुक्रिया”! किस्से तमाम ऐसे सारे याद है मुझे, जब मैंने किया न कुछ,न तूने कुछ किया! यार तू अभी अपनी कॉपी न जमा करना, मैंने अभी कल का होमवर्क नहीं किया! सुन तू फलां से कोई भी बात न करना, माँगा था… Continue reading दोस्ती मुबारक!

अनुरागी बैरागी!

वैराग से यदि अनुराग रहेगा, क्या वैराग, वैराग रहेगा? है बारीक़ पर अंतर तो है निर्मम और निर्मोही में! ज्यादा नहीं तो कुछ यों जैसे, आतंकी विद्रोही में! अर्थ-भेद जो समझे ये तुम, सार समझ तब आएगा! है मगर ये ज्ञान क्षणिक ही, आर्त अर्थ भरमाएगा! (आर्त-पीड़ा, अर्थ- भौतिक द्रव्य) संभलें हम कि डगर कठिन… Continue reading अनुरागी बैरागी!

शब्द सराय में!

मेरा लेखन मेरे शब्दों की जीवनयात्रा हैं, और तुम्हारा उन्हें पढ़ लेना, उनका मोक्ष! न जाने अभी कितना और भटकना होगा, कितनी यात्राएं पूरी करनी होगी! बड़े लोग कहते है न? मोक्ष...सरल नहीं है..! मोक्ष प्राप्त करने के लिए छोड़नी होगी, मोक्ष की कामना! पर बिना मंज़िल का पता जाने... कितना चल पायेंगे मेरे शब्द..और… Continue reading शब्द सराय में!

ख़ैर..यूंही!

नाम लिया और सलीक़ा छोड़ दिया, स्वाद ज़ुबां पर उसने फीका छोड़ दिया आते आते हिचकी हलक में रूक गयी, याद आने का हमने तरीका छोड़ दिया हँसी, मोहब्बत, अल्हड़पन औ बेबाकी जो कुछ भी था तुमसे सीखा छोड़ दिया! तुम बड़े हो सो तुम पर भी लाज़िम है, लड़ना हमने तो बेवज़ह ही का… Continue reading ख़ैर..यूंही!